जब किसी व्यक्ति के द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले उत्पाद कसौटी पर नहीं उतरते तो शिकायत करने की स्थिति सबके सामने आ जाती है। ऐसे मैं आपको गुस्सा आता है और आप इसके लिए जिम्मेदार व्यक्ति को पकड़कर उसे पीटने लगते हैं और उसे पर गुस्सा निकालने लगते हैं। पर यह सब करने के बाद भी आपको वह चीज हासिल नहीं होती जिसकी आपको अपेक्षा होती है। गुस्सा करने से आपको किसी प्रकार की मदद नहीं मिलती ऐसे हालातो से निपटने के लिए नीचे कुछ उपाय दिए गए हैं।

मौखिक शिकायत
आपको अपने दिमाग को शांत रखना चाहिए और संगठन के संबंधित व्यक्ति को फोन करना चाहिए गुस्सा होने से पहले आप यह तय कर लीजिए कि आप क्या चाहते हैं। खराब माल की मरम्मत करने उसे बदलने या माफी मंगवाना चाहते हैं?
अगर आप किसी बात पर गुस्सा है तो कम शब्दों में अपनी बात को सामने रखिए आपको गड़े मुर्दे उखाड़ने की जरूरत नहीं है।
अगर आपको समाधान नहीं मिल रहा है तो आप समय खर्च करने के लिए तैयार रहिए। अगर आपको सही जवाब ना मिल रहा हो तो मामले से संबंधी दूसरे व्यक्ति से संपर्क साधना करिए।
गुस्से में कभी किसी व्यक्ति को धमकी नहीं देना चाहिए क्योंकि वह कब आपके काम आ जाए आपको पता नहीं होता।
कभी भी सख्त होकर बात मत करिए क्योंकि आपको जो चीज चाहिए होती है वह आपको नहीं मिल पाएगी। लिहाजा अपना बर्ताव अच्छा रखिए अधिकतर बिजनेस प्रतिष्ठान नियमित ग्राहकों का ध्यान रखते हैं। अगर आप उनमें से एक है तो इस बारे में उन्हें बताइए ऐसी स्थिति में वह आपके ऊपर ज्यादा ध्यान देंगे।

लिखित शिकायत
कई मामलों में लिखित में सुनवाई करने की जरूरत पड़ती है। ऐसे मामलों में आप काम से कम शब्दों में बात लिखिए। अगर आपको किसी कंपनी से शिकायत है तो आप उन्हें बताइए कि सब को छोड़कर अपने उनकी कंपनी से सम्मान को खरीदा उसके बाद आप बताइए कि अपने सामान क्यों खरीदा और उस समान से आपको क्या परेशानी आ रही है। कंपनी को यह भी बताइए कि आप किस तरह का समाधान चाहते हैं।
आपने सारी बात बताइए कि आप संतुष्ट कैसे होंगे अगर आप सामान वापस कर के पैसा वापस लेना चाहते हैं तो उन्हें बताइए अगर आप सामान को बदलना चाहते हैं तो उन्हें बताइए उनकी प्रतिक्रिया के लिए एक तिथि बता दीजिए जिससे कि उनके लिए आपका काम प्राथमिकता बन जाए।
बारीकियां से शिकवा करना
जब आप किसी से शिकायत करते हैं तो उसका असली पहलू गलत को सही करना होता है ना की लड़ाई झगड़ा करना। अगर आप चाहते हैं कि सामने वाला व्यक्ति आपकी शिकायत के ऊपर पूरा ध्यान दे तो ऐसे में आप नीचे दी गई सुझावों के बारे में पढ़ सकते हैं।
अगर आपको किसी व्यक्ति या दुकान या कंपनी से शिकायत है तो आप उन्हें अपनी पूरी बात बताइए। अपनी पूरी बात बताने के बाद आपने उस जगह से जो पहले सामान खरीदा है उस समान की प्रशंसा कीजिए। ऐसे में जिस व्यक्ति को आप अपनी शिकायत बता रहे हैं उसका पूरा ध्यान आपकी तरफ आ जाएगा और वह आपकी शिकवा को गौर से सुनेगा।
आप शिकायत करने वाले व्यक्ति से चिल्ला कर बात मत करिए अगर आप तेज आवाज में बात कर रहे हैं तो उस व्यक्ति को पता नहीं चलना चाहिए कि आपकी नाराजी सीधे उसे व्यक्ति से नहीं है।
जिस व्यक्ति से आप शिकायत कर रहे हैं उस व्यक्ति की मानसिक स्थिति जानने की कोशिश करें अगर सामने वाले व्यक्ति की स्थिति ठीक नहीं है तो उसका कारण तनाव भी हो सकता है। अगर आप उस व्यक्ति की मदद हासिल करना चाहते हैं तो आप उनसे सीधा पूछे कि आज आपका दिन मेरी तरह अच्छा नहीं है क्या? इससे उसे व्यक्ति पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
कभी किसी पर अचानक हमला मत करिए जो लोग बिजनेस करते हैं वह अपने कस्टमर को खुश रखना चाहते हैं यदि कहीं गड़बड़ी होती है तो कस्टमर उन्हें सूचित करते हैं तो वह इसकी सरहाना करते हैं।
शिकायत किसी भी व्यक्ति की समस्या, असंतोष या अधिकारों से जुड़ी बात को उचित स्थान तक पहुँचाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। जब किसी व्यक्ति को किसी सेवा, संस्था, व्यवस्था या व्यक्ति से परेशानी होती है, तो वह अपनी समस्या को शिकायत के माध्यम से सामने रख सकता है। शिकायत का उद्देश्य केवल किसी की गलती बताना नहीं होता, बल्कि समस्या का समाधान प्राप्त करना और व्यवस्था में सुधार लाना भी होता है।
एक सही शिकायत हमेशा स्पष्ट, तथ्यपूर्ण और शांत भाषा में की जानी चाहिए।शिकवा करते समय समस्या से संबंधित आवश्यक जानकारी, घटना का विवरण और उपलब्ध प्रमाणों को शामिल करना उपयोगी होता है। इससे संबंधित अधिकारी या संस्था के लिए समस्या को समझना और उसका समाधान करना आसान हो जाता है। बिना पूरी जानकारी या गलत तथ्यों के आधार पर की गई शिकायत कई बार समस्या को हल करने के बजाय और अधिक भ्रम पैदा कर सकती है।
शिकायतों का समय पर समाधान होना भी बहुत आवश्यक है। यदि किसी व्यक्ति की शिकवा को गंभीरता से सुना जाता है और उचित कार्रवाई की जाती है, तो इससे लोगों का किसी संस्था या व्यवस्था के प्रति विश्वास बढ़ता है। इसके विपरीत, शिकायतों को लगातार नजरअंदाज करने से लोगों में असंतोष बढ़ सकता है। इसलिए प्रत्येक शिकवा को निष्पक्ष तरीके से देखना और परिस्थितियों के अनुसार उचित निर्णय लेना जरूरी है।
आज के समय में शिकायत दर्ज करने के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यम उपलब्ध हैं। कई सरकारी विभाग, कंपनियाँ और संस्थाएँ अपनी वेबसाइट, मोबाइल ऐप, ईमेल और हेल्पलाइन के माध्यम से शिकायत प्राप्त करती हैं। डिजिटल माध्यमों ने शिकवा दर्ज करने की प्रक्रिया को पहले की तुलना में अधिक आसान और सुविधाजनक बनाया है। फिर भी शिकायतकर्ता को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वह सही विभाग या संस्था के पास अपनी शिकायत दर्ज कर रहा है।
अंततः कहा जा सकता है कि समस्या समाज और व्यवस्था में सुधार का एक महत्वपूर्ण साधन है। एक जिम्मेदार शिकायत समस्या की ओर ध्यान आकर्षित करती है और समाधान का रास्ता खोलती है। शिकायत करने वाले व्यक्ति को अपने अधिकारों के साथ-साथ अपनी जिम्मेदारियों को भी समझना चाहिए। वहीं संबंधित संस्था का कर्तव्य है कि वह शिकवा को ध्यानपूर्वक सुने, तथ्यों की जाँच करे और उचित समय में निष्पक्ष समाधान प्रदान करे। इस प्रकार शिकवा केवल समस्या बताने का माध्यम नहीं, बल्कि बेहतर व्यवस्था, पारदर्शिता और सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बन सकती है।